तिल तिल देकर आहुति से

यहाँ शब्द नहीं अनुभूति है 

अनुभव से सब कुछ पाया है

अनुभूति जितनी गहरी हो 

ठहरी उतनी ही काया है

 

जब घना अँधेरा छाता है

 चिंतन गहरा हो जाता है

मन यादो की कस्तूरी से

 खुशबू लेकर कुछ गाता है

खुशबू से नज्मे भरी हुई 

यहाँ दर्द हुआ हम साया है 

 

जहाँ ह्रदय मिला कोई घाव नहीं 

वहा शब्द रहे पर भाव नहीं

 जो मस्त रहा है हर पल पल 

जीवन रहते अभाव नहीं  

मस्ती में झूम झूम कर हरदम

नव गीत अनोखा पाया है 

 

जहा रही वेदना मर्म रहा

रचना का अपना धर्म रहा

कोई धन्य हुआ अनुभूति से

तिल तिल देकर आहुति से

वह मानवता का वंदन कर

जीवन को समझा पाया है 

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समुद्र देव

लहर लहर संवारता हिलोर पे है वारता

चैतन्यता सदैव है चैतन्यता सदैव है

दया निधि पयोनिधि रत्नभरा अतुल निधि

दिखा समुद्र देव है दिखा समुद्र देव है

रहा समुद्र देवता वारि बादल से भेजता

नैया को माँझी खेवता पथिक रहा अजेय है

 बने नवीन द्वीप है मोती बने है सीप है

अमरता का संचरण विविध बनाता जैव है

 

 

 

कागज के फूल

सौंदर्य दे सकते है

सुगंध नहीं देते

गरजते हुए बादल

क्षणिक रोशनी दे सकते है

परन्तु बारिश नहीं देते

चमकते हुए तारो को

देख मन तो प्रसन्न हो सकता है

परन्तु रात की कालिमा

दूर नहीं कर सकते है

दूर क्षितीज जितना आकर्षक दिखता

उतना होता नही है

जल प्रवाह

जल कितना कोमल तरल निर्मल होता है ।जल में जो रंग घुल जाए जल उसी रंग को धारण कर लेता है परन्तु जो लोग कोमलता कोमलता को कमजोरी निर्मलता को निर्बलता सह्रदयता को भोलापन समझते है उन लोगो को जलप्रवाह की शक्ति का अनुभव करना चाहिए ।जल के भीतर की प्रचंड ऊर्जा उन्हें सरलता कोमलता निर्मलता की क्षमता से परिचित करा देगी

UNIVERSE: अस्मिता

http://vaibhavmadhavcreater.blogspot.com/2018/07/blog-post_14.html?m=1

अस्मिता व्यक्ति का सम्बल है पहचान है

अस्मिता बिन व्यक्ति का व्यक्तित्व रहा अनजान है

अस्मिता स्वयं में विश्वास है

जीवन का साहित्य है अनुप्रास है

संस्कृतियों की प्रतिष्ठा है

स्त्रीत्व का सुखद अहसास है

अस्मिता एक राष्ट्रीयता की भावना है

प्रवाह की निरंतरता नित्य होती साधना है

अस्मिता आत्मानुभूति महाप्राण है

मनुष्यता के हाथो में परमात्मा का वरदान है

इसलिए हे!मनुज अपनी अस्मिता बचाओ

अस्मिता से परिवार को निज संस्कार से सजाओ